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मझधार - कविता संग्रह

मझधार - कविता संग्रह

Publish Date: 01/09/2026
₹179 ₹299

कविताएँ सिर्फ़ शब्द नहीं होतीं, वे उस सन्नाटे की आवाज़ हैं जिसे हम अक्सर शोर के पीछे छुपा देते हैं। 'मझधार' में संकलित ये 40 कविताएँ किसी एक विचार या समय की उपज नहीं हैं, बल्कि जीवन के अलग-अलग मोड़ों पर ठहरी अनुभूतियों, प्रश्नों और स्मृतियों से बनी हैं। ये उस मन की यात्रा हैं जो विशाल और कोलाहल से भरे संसार में रहते हुए भी अपने हिस्से के एकांत और सच की तलाश करता रहा।

इस संग्रह में प्रकृति के उदास रंग हैं, शहर की घुटन है और मनुष्य के भीतर चलती जद्दोजहद की तपिश भी। यहाँ 'मणिकर्णिका' में जीवन और मृत्यु के बीच बहता मौन है, 'फूल और कीचड़' में हमारे समय की विडंबनाओं से मुठभेड़ है, और 'पिता की आँखें' में अनकहा प्रेम धरती के भीतर बहते जल की तरह उपस्थित है। 'दिसंबर का हिसाब' बीते समय की परतें खोलता है, जबकि 'मझधार कोई नदी नहीं' जीवन के उन ठहरे हुए क्षणों को छूती है जहाँ दिशा से अधिक प्रश्न हमारे साथ चलते हैं।

ये कविताएँ केवल पढ़े जाने के लिए नहीं हैं। वे एक ऐसे दर्पण की तरह हैं जिसमें पाठक अपने अनकहे सवालों, अधूरे सपनों और भीतर चलती हलचल का चेहरा देख सकता है। जीवन की इस मझधार में जब कोई किनारा साफ़ नहीं दिखता, शब्द ही कभी सहारा, कभी साक्षी और कभी खेवनहार बनते हैं। मुझे आशा है कि इन कविताओं से गुज़रते हुए आप अपने अनुभवों और बेचैनियों की प्रतिध्वनि महसूस करेंगे।

  • Book Title:
    मझधार - कविता संग्रह
  • Author:
    ऋषभ शुक्ला
  • Language:
    Hindi
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Book Description

कविताएँ सिर्फ़ शब्द नहीं होतीं, वे उस सन्नाटे की आवाज़ हैं जिसे हम अक्सर शोर के पीछे छुपा देते हैं। 'मझधार' में संकलित ये 40 कविताएँ किसी एक विचार या समय की उपज नहीं हैं, बल्कि जीवन के अलग-अलग मोड़ों पर ठहरी अनुभूतियों, प्रश्नों और स्मृतियों से बनी हैं। ये उस मन की यात्रा हैं जो विशाल और कोलाहल से भरे संसार में रहते हुए भी अपने हिस्से के एकांत और सच की तलाश करता रहा।

इस संग्रह में प्रकृति के उदास रंग हैं, शहर की घुटन है और मनुष्य के भीतर चलती जद्दोजहद की तपिश भी। यहाँ 'मणिकर्णिका' में जीवन और मृत्यु के बीच बहता मौन है, 'फूल और कीचड़' में हमारे समय की विडंबनाओं से मुठभेड़ है, और 'पिता की आँखें' में अनकहा प्रेम धरती के भीतर बहते जल की तरह उपस्थित है। 'दिसंबर का हिसाब' बीते समय की परतें खोलता है, जबकि 'मझधार कोई नदी नहीं' जीवन के उन ठहरे हुए क्षणों को छूती है जहाँ दिशा से अधिक प्रश्न हमारे साथ चलते हैं।

ये कविताएँ केवल पढ़े जाने के लिए नहीं हैं। वे एक ऐसे दर्पण की तरह हैं जिसमें पाठक अपने अनकहे सवालों, अधूरे सपनों और भीतर चलती हलचल का चेहरा देख सकता है। जीवन की इस मझधार में जब कोई किनारा साफ़ नहीं दिखता, शब्द ही कभी सहारा, कभी साक्षी और कभी खेवनहार बनते हैं। मुझे आशा है कि इन कविताओं से गुज़रते हुए आप अपने अनुभवों और बेचैनियों की प्रतिध्वनि महसूस करेंगे।

  • Book Title

    मझधार - कविता संग्रह

  • Author

    ऋषभ शुक्ला

  • Language

    Hindi

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