यादें, लम्हे और कसक
₹299आप सभी सम्मानित पाठक बंधु और रचनाकारों को ‘यादें, लम्हे और कसक’ के संपादक शैलेन्द्र कुमार का प्रणाम। ऐसा शायद ही कोई व्यक्ति होंगे जिनके पास कोई यादें न हो, कोई लम्हे न हो जिसको वे मिस न करते हों। चाहे ही वह संघर्ष व कठिन परिस्थितियों का ही पल क्यों न हो या प्यार-भरा सुनहरा सफर जिसमें कोई खोना न चाहता हो या जिसको याद कर आंखें नम न हो या अपने संघर्षों से निकलने के हौसलों पर गर्व का मीठा-मीठा सहानुभूति-भरा एहसास न हो। कुछ लोगों के जीवन में कुछ ऐसा ‘कसक’ भी रह जाता है जिसका व्यक्ति को मलाल रह जाता है उसकी चाहत होती है कि यदि ऐसा मौका मिले तो उस पल को था उससे मिलते-जुलते पल को भी बेसब्री से जी लेना चाहता है। इसी सोच को लेकर मेरे विचार में यह आया कि क्यों न एक साझा संकलन प्रकाशित किया जाए जिसमें सभी की ‘यादें, लम्हे और कसक’ को संजोया जाए और आप तक पहुंचाया जाए ताकि इन सभी से हम सभी को कुछ जानने, सिखने और प्रेरणा लेने का मौका मिल सके। अपना संकलन/ पुस्तक लाने का प्रयास तब मन में आया जब मैं शिक्षा-संकाय BHU की वार्षिक पत्रिका में अपनी रचना प्रकाशित कराने के लिए आदरणीय प्राध्यापिका रश्मि मैम से संपर्क किया तो उन्होंने असमर्थता जाहिर करते हुए बड़े ही विनम्र भाव से बताया कि बेटा अब आप Ex-student हो चुके हैं और पत्रिका में केवल वर्तमान student की रचना ही प्रकाशित होती है। लेकिन चाह थी और कहा जाता है कि जहां चाह होता है वहीं राह होता है और रास्ता मेरे प्रयास के बदौलत बनता गया जिसके परिणाम के रूप में यह पुस्तक ‘यादें लम्हे और कसक’ आप सभी के समक्ष प्रस्तुत है। शुरुआत में तो शीर्षक भी तय नहीं था। सभी रचनाकारों को मुझ पर विश्वास और भरोसा जताने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। पहली पुस्तक है और कुछ गड़बड़ न हो इसलिए थोड़ा समय लगा इसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं। अनुभवी रचनाकार एवं बुद्धिजीवी पाठक बंधु से निवेदन है कि कुछ त्रुटि रह गई हो मुझ से या मेरे किसी रचनाकार से तो क्षमा कीजिए क्योंकि यह मेरा तो पहला अनुभव है हीं कुछ रचनाकार का भी पहला-पहला अनुभव है और कुछ तो रचनाकार मेरे प्रयास और प्रेरणा से लिखने और रचना भेजने का हिम्मत जुटा पाएं हैं। उन में कमी निकालने से बेहतर उनको प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। आप से आशा है कि आप उन्हें मनोबल प्रदान करेंगे। बहुत-बहुत आभार
-
Book Title:
यादें, लम्हे और कसक -
Author:
संपादक : शैलेन्द्र कुमार -
Language:
Hindi
Book Description
आप सभी सम्मानित पाठक बंधु और रचनाकारों को ‘यादें, लम्हे और कसक’ के संपादक शैलेन्द्र कुमार का प्रणाम। ऐसा शायद ही कोई व्यक्ति होंगे जिनके पास कोई यादें न हो, कोई लम्हे न हो जिसको वे मिस न करते हों। चाहे ही वह संघर्ष व कठिन परिस्थितियों का ही पल क्यों न हो या प्यार-भरा सुनहरा सफर जिसमें कोई खोना न चाहता हो या जिसको याद कर आंखें नम न हो या अपने संघर्षों से निकलने के हौसलों पर गर्व का मीठा-मीठा सहानुभूति-भरा एहसास न हो। कुछ लोगों के जीवन में कुछ ऐसा ‘कसक’ भी रह जाता है जिसका व्यक्ति को मलाल रह जाता है उसकी चाहत होती है कि यदि ऐसा मौका मिले तो उस पल को था उससे मिलते-जुलते पल को भी बेसब्री से जी लेना चाहता है। इसी सोच को लेकर मेरे विचार में यह आया कि क्यों न एक साझा संकलन प्रकाशित किया जाए जिसमें सभी की ‘यादें, लम्हे और कसक’ को संजोया जाए और आप तक पहुंचाया जाए ताकि इन सभी से हम सभी को कुछ जानने, सिखने और प्रेरणा लेने का मौका मिल सके। अपना संकलन/ पुस्तक लाने का प्रयास तब मन में आया जब मैं शिक्षा-संकाय BHU की वार्षिक पत्रिका में अपनी रचना प्रकाशित कराने के लिए आदरणीय प्राध्यापिका रश्मि मैम से संपर्क किया तो उन्होंने असमर्थता जाहिर करते हुए बड़े ही विनम्र भाव से बताया कि बेटा अब आप Ex-student हो चुके हैं और पत्रिका में केवल वर्तमान student की रचना ही प्रकाशित होती है। लेकिन चाह थी और कहा जाता है कि जहां चाह होता है वहीं राह होता है और रास्ता मेरे प्रयास के बदौलत बनता गया जिसके परिणाम के रूप में यह पुस्तक ‘यादें लम्हे और कसक’ आप सभी के समक्ष प्रस्तुत है। शुरुआत में तो शीर्षक भी तय नहीं था। सभी रचनाकारों को मुझ पर विश्वास और भरोसा जताने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। पहली पुस्तक है और कुछ गड़बड़ न हो इसलिए थोड़ा समय लगा इसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं। अनुभवी रचनाकार एवं बुद्धिजीवी पाठक बंधु से निवेदन है कि कुछ त्रुटि रह गई हो मुझ से या मेरे किसी रचनाकार से तो क्षमा कीजिए क्योंकि यह मेरा तो पहला अनुभव है हीं कुछ रचनाकार का भी पहला-पहला अनुभव है और कुछ तो रचनाकार मेरे प्रयास और प्रेरणा से लिखने और रचना भेजने का हिम्मत जुटा पाएं हैं। उन में कमी निकालने से बेहतर उनको प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। आप से आशा है कि आप उन्हें मनोबल प्रदान करेंगे। बहुत-बहुत आभार
-
Book Title
यादें, लम्हे और कसक
-
Author
संपादक : शैलेन्द्र कुमार
-
Language
Hindi
Related books
The House o...
₹500.00₹525.00"House of Gratitude and Apology" is m... More Detailsकिताब एक अध...
₹200.00₹300.00"किताब एक अधूरा किस्सा" यह कहानी ह... More Details